बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

डॉ.सत्यजीत साहु-आधुनिक चिकित्साशास्त्र एंव ज्योतिषशास्त्र का संगम-“चिट्ठाकार चर्चा” (ललित शर्मा)

नए मौसम आते हैं, ऋतुएं बदलती है. ऋतुओं का संधि काल होता है. ज्योतिष के द्वारा संधियों का काल जाना जाता था. भास्कराचार्य ने सिद्धांत शिरोमणि में कहा है कि वेदों में यज्ञों का वर्णन है और यज्ञ काल के आश्रित होते हैं. इसलिए जिसमे काल का वर्णन हो वह ज्योतिषशास्त्र वेद का अंग कहलाता है. ज्योतिष वेद का नेत्र इसलिए कहा गया है कि ज्योतिष से समय दिखलाई पड़ता है.संधियाँ कई प्रकार हैं. प्रात: सांय की संधि में हवन संधि, मास की संधि, ऋतू की सन्धि, चातुर्मास्य की सन्धि, दोनों अयनो की सन्धि. यही सब संधियाँ पर्व भी कहलाती हैं. इनका सूक्ष्म ज्ञान ज्योतिष से ही होता है. पक्ष और मास की सन्धि चाहे चन्द्रमा के स्थूल अवलोकन से पूर्णिमा और अमावश्य को हो जाये पर, ऋतू, अयन, संवत्सर का संविज्ञान जब तक सायन गणनानुसार ज्योतिष का ज्ञान ना हो, तब तक नहीं हो सकता. अर्थात हमारे जीवन में ज्योतिष का महत्व प्राचीन काल से है और इसके बिना हम अधूरे हैं....अब आप सोच रहे होंगे की ज्योतिष के विषय में मै क्यों लिख रहा हूं? तो आज आपसे एक ज्योतिषी से परिचय करवाना  चाहता हूँ. तो अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ चिट्ठाकार चर्चा पर.............
हमारी आज की चिट्ठाकार चर्चा में शामिल चिट्ठाकार हैं डॉ.सत्यजित साहू. जो की पेशे से एम्.बी.बी.एस डाक्टर हैं तथा इनकी रूचि चिकित्सा के अध्यन के साथ-साथ ज्योतिष शास्त्र में भी है. जिसे पूरी श्रद्धा के साथ निभाते है. अपने मरीजों के हाथ की नाड़ी देखने के साथ-साथ उनकी जन्मकुंडली भी देखते हैं दोनों के सामंजस्य से सफल इलाज भी करते हैं. इनका डॉ.सत्यजीत साहू नामक ब्लाग है. इस पर वे अपने ज्योतिष विषयक पोस्ट लिखते हैं.
अपनी प्रोफ़ाईल पर ये परिचय कुछ इस तरह से देते है।

drsatyajit sahusatyajit sahu2

मेरे बारे में

I am medical practioner and remedial astrologer neumerologist.I am desciple of my beloved gurudev swami chinmaya yogi (shri rajat bose )who is desciple of bhagwan shree rajneesh (osho).NIRAV RAJNEESH MEDITATION CENTER (NRMC) is located at Budhapara Raipur (C.G.)This center is alloted by Bhagwan Shree Rajneesh in year 1979. I am practising here under the guidence of my Gurudev since 1999.I am on this blog to publish my view's on ASTROLOGY,GURUSHISHYA PARAMPARA,SPIRITUALITY AND OCCULT SCIENCE.
इनकी पहली पोस्ट

शुक्रवार, २४ जुलाई २००९




Why Dr.Satyajit Sahu is blogging


When Ramkrishna paramhansa hear the vivakanand singing the song "man chalo nij niketane" has got the stanza that" oh heart please keep the virtue well within the heart and keep it secret". Once a learned man denies to share me his experience by quoting this. All the world is related with communication and if you are not relating your self to other then gradually all the virtuous thing will vanish and this earth remain barren . so change it i am doing this . and now it is here. Well now it starts on blog to share the thought of drsatyajitsahu. I ask myself that why i write this blog? my answer is that i have passion for SPIRITUALITY, ASTROLOGY,NUMEROLOGY ,OCCULT SCIENCE,MEDICINE, GENERAL PRACTICE OF MEDICINE ,GURUSHIYSHA PRAMPARA,MEDITION. I have been doing all this since last 10 years. Plenty of thougths and personal findings are there with this journey.I have been with my gurudev since 1999 and had seen learn a lot of things regarding all rounds of life.
Now i am on blog to share my wonderful life with my beloved gurudev and my experience
अद्यतन पोस्ट

मंगलवार, २ फरवरी २०१०


गुरुकृपा से साबर तंत्र सिद्धि


गुरुदेव से मार्गदर्शन में हम गुरुभाई साधना १० साल से कर रहे है .पहले साधना सौम्य प्रकृति की थी पर अब हम लोग साबर तंत्र की साधना कर रहे है ।
जनवरी के चन्द्र और सूर्य ग्रहण में हम लोगो को सिद्धि का बहुत अच्छा अवसर मिला और भैरवी माँ और गुरुकृपा से हमारी साधना सफल रही ।
साबर तंत्र से लोगो की समस्या का तात्कालिक हल दिलाने में हम लोग कामयाब हो रहे है .इसके परिणाम दिखने से हमारा उत्साह बढ़ गया है .हमारी सारी ऊर्जा अब साबर साधना की तरफ है ।
गृहस्थ लोगो के लिए अघोर साधना अनुकूल नहीं होती है .वैदिक साधना में रिजल्ट बहुत देर से आता है .तंत्र का जो आकर्षण चमत्कारिक रिजल्ट प्राप्त करने के लिए हमरे मन में बहुत दिनों से था । साबर तंत्र का रिजल्ट देखने से मन की वो अभिलाषा पूरी हुई ।
साबर में जिन शक्ति के माध्यम से कम होता है वो शुभ शक्ति होती है .सभी शक्ति में गुरु की शक्ति सबसे बड़ी होती है .इस बात का प्रमाण साबर का रिजल्ट देखने के बाद और पुखता हुआ ।
अध्यात्म में ,साधना में , सदगुरु मिलने से ही कम बनता है .
जय गुरु महाराज की जय

अब देते है चिट्ठाकार चर्चा को विराम-आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम 

सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

युवा प्रखर-मुखर मिथलेश दुबे- चिट्ठाकार-चर्चा (ललित शर्मा)

नवयुवाओं के विषय में बुजुर्ग लोग हमेशा सोचते हैं कि इनकी बुद्धि अभी परिपक्व नहीं हुयी है. ज्यादा दूर की नहीं सोच सकते. बिना सोचे समझे उल्टा-सीधा करते रहते हैं. जब भी मौका मिलता है तो उनको फटकार दिया जाता है.हमारे साथ भी यही होता था. हम भी जब कभी बुजुर्गों की महफ़िल में बोल उठते थे तो हमें कहा जाता था अरे! ये बात तुम्हारी समझ में आने की नहीं है. बड़ों के बीच में नहीं बोलना चाहिए. नव युवा भी इस समाज को अपने नजरिये से देखते हैं. उनकी व्यक्तिगत सोच होती है चितन  होता है. किसी भी काम को तत्परता से करते है और घनात्मक सोच भी रखते हैं. जिसकी सोच परिपक्व होती है और सही दिशा में सोचता है उसे अबाल वृद्ध कहा गया है. अब मै ललित शर्मा ले चलता हूँ आपको आज की चिट्ठाकार-चर्चा पर …
हमारी चर्चा में शामिल आज के नव युवा चिट्ठाकार हैं मिथलेश दुबे जी. इनका अपनी बात कहने का अंदाज ही निराला है. कभी-कभी बहुत ही विचारोत्तेजक विषय चुनते है तथा उस पर सीधा हमला ही बोलते हैं ठांय-ठांय और कभी घर गृहस्थी की सोच मेंपड़ जाते हैं तो जलेबी समोसे को भी लपेटे में ले लेते हैं. इनकी मिसाईल चौतरफा वार करते है. जो इसकी जद में आ गया उसका तो कल्याण ही हो जाता है. इनका ब्लाग दुबे है तथातेताला, लख़नऊ ब्लॉगर एसोसिएशन,हिन्दी साहित्य मंच पर भी इनकी उपस्थिती है.
 ब्लाग प्रोफ़ाईल पर अपने विषय मे कुछ इस तरह लिखते है……….

Mithilesh Dubey

मेरे बारे में

कभी यूं गुमसुम रहना अच्छा लगता है , कभी कोरे पन्नों को सजाना अच्छा लगता है , कभी जब दर्द से दहकता है ये दिल तो , शब्दों में तुझको उकेरना अच्छा लगता है ।। अगर आप मुझसे बात करना चाहें तो संपर्क करें-09891584813
……इनकी पहली पोस्ट….

Saturday, May 16, 2009


Introduction
hi dosto, kise ho aap log mai aap logo ko batana chahta hun kee mai ek naya bloger hun, plese agar mai kuch bhi galat likhu to aap salah de sakto ho.
…अद्यतन पोस्ट.
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Friday, January 29, 2010


शरीर दिखाने वाले कपडे पहनने को आजादी कतई नहीं माना जा सकता----(मिथिलेश दुबे)
आजादी को परिभाषित करना बहुत मुश्किल है। हर इंसान अपनी बुद्धि का सही उपयोग करते हुए आजादी की सीमा तय करता है। हर व्यक्ति स्वतंत्र रहना चाहता है, परंतु इसकी अधिकता कभी-कभी नुकसानदेह साबित होती है। आज बेटी-बेटे को समानता का दर्जा दिया जाता है, लेकिन समाज का माहौल देखते हुए लडकियों की सुरक्षा की दृष्टि से माता-पिता उनकी आजादी की सीमाएं तय कर देते हैं, जो कि किसी दृष्टि से गलत नहीं है। यही बात बेटों पर भी लागू होती हैं। उन्हें भी अनुशासित करने के लिए समय-समय पर उनकी आजादी की सीमाएं तय करना बहुत जरूरी है। आजादी में संतुलन बहुत जरूरी है। मेरे विचार से आजादी का सही अर्थ है-सामंजस्य।
अगर हर इंसान आजादी के साथ अनुशासन का भी महत्व समझे तभी देश सही मायने में आजाद होगा। वर्षो की गुलामी सहने और लाखों देशवासियों का जीवन खोने के बाद हमने यह बहुमूल्य आजादी पाई है। लेकिन आज की युवा पीढी आजादी का वास्तविक अर्थ भूलती जा रही है। पश्चिमी संस्कृति का अंधानुकरण कर वह अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से दूर होती जा रही है। नशाखोरी, मौज-मस्ती करना, धर्म और जाति के नाम पर दंगे करना और राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति पहुंचाना भी आज कुछ लोगों को गलत नहीं लगता। अधिकारों की दुहाई देने वाले क्या कभी अपने कर्तव्यों की भी बात करते हैं? सच तो यह है कि ऐसा करना अमूल्य आजादी का दुरुपयोग है।
आज हमारे देश में चारों ओर भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और आतंक का अंधकार छाया है। ऐसी स्थिति में सभी देशवासियों का कर्तव्य है कि वे एक भयमुक्त, सुव्यवस्थित, सुसंगठित और विकसित समाज की स्थापना में योगदान करें। युवा पीढी आजादी के साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझे। अपनी आजादी के साथ दूसरों की स्वतंत्रता एवं निजता का भी ध्यान रखे। अनुशासित हो, केवल अपनी मनमर्जी न करे। मेरे विचार से आजादी की एक सीमा रेखा अवश्य होनी चाहिए। इसी में परिवार, समाज और देश का कल्याण संभव है। धर्म और जाति के भेदभाव के बिना सभी नागरिक आजादी के साथ सुकून की सांस ले सकें, आजादी का यही असली मकसद होना चाहिए। आजादी का सीधा अर्थ होता है किसी पर निर्भर न होना, आत्मसम्मान के साथ सर उठा कर जीना। लेकिन आज लोग अपने निजी स्वार्थो के लिए आजादी को मनचाहे ढंग से परिभाषित करते हैं। दूसरों की असुविधा को ध्यान में रखे बिना हर काम अपनी मनमर्जी से करने, अनुशासन के नियमों को तोडने और पश्चिमी सम्यता का अंधानुकरण करते हुए शरीर दिखाने वाले कपडे पहनने को आजादी कतई नहीं माना जा सकता। बौद्धिक स्तर पर हम कितने आजाद हैं, यह बात ज्यादा महत्वपूर्ण है।
अब देता हुँ चर्चा को विराम-आप सभी को ललित शर्मा का राम

रविवार, 31 जनवरी 2010

तोषी-वूजूद की तलाश में “चिट्ठाकार-चर्चा” (ललित शर्मा)

हमारा छत्तीसगढ़ प्रतिभाओं से लबालब भरा हुआ है. यहाँ किसी चीज की कमी नहीं है. बहुमुल्य रत्नो खनिजों से लेकर योग्य प्रति्भाओं तक्। सब कुछ है, पर कु्छ वर्षों से पिछ्ड़े होने का ठप्पा लगा दिया गया है. लेकिन छत्तीसगढिया पिछड़ा कहीं से नहीं है. प्रत्येक कार्य में अपनी कुशलता और प्रतिभा का परिचय अवश्य ही देता है. नई विधाओं में भी इन्होने हाथ अजमाया है. यह देखने में आया है ब्लागिंग के क्षेत्र में. इस क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. पुराने (सीनियर)  ब्लागरों की छत्र-छाया में नए ब्लागर भी पनप रहे हैं तथा उनका भरपूर स्नेह के साथ मार्ग दर्शन भी दिया जा रहा है. मै सीनियर ब्लागरों को प्रणाम करता हूँ तथा मैं ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ आज की चिट्ठाकार चर्चापर......................
हमारी आज की चिट्ठाकार चर्चा में शामिल ब्लागर हैं तोषी गुप्ता जी. शिक्षा के क्षेत्र से जुडी हैं. इन्होने अभी ब्लाग पर कम ही लिखा है लेकिन ज्वलंत विषयों की समझ रखती है. अपने विचार स्पष्ट रूप से रखती है.इनके ब्लाग का नाम है तोषी-वुजूद की तलाश में. इनकी पहली पोस्ट तोषी गुरुवार १३नवम्बर २००८ की है. जिसमे अपने नाम के शब्दार्थ बताती हैं.
तोषी अपनी प्रोफाईल पर लिखती हैं........

toshi gupta

मेरे बारे में

....स्कूल में थी जब अपनी भावनाओ को डायरी के पन्नो में सहेज कर रखती थी, पन्ने भरते गए और इधर ज़िन्दगी पन्ने भी बदलते गए,...फिर अपने दिल कि बातो को प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यमो से लोंगो तक पहुचाती रही...फिर जिंदगी के मायने ही बदल गए... फिर लगा ज़िन्दगी रूक सी गई है...थम सी गई है..पता चला मै अपनी प्यारी सखी, अपनी डायरी से दूर जो हो गई हू...पीछे पलट कर देखा, ऐसा लगा मेरी प्यारी सखी मेरा अभी तक इंतज़ार कर रही है.दौड़कर उसका हाथ थाम लिया,ज़िन्दगी भर साथ निभाने के वायदे के साथ...इस ब्लॉग "तोषी" के माध्यम से...
इनकी पहली पोस्ट

toshi

"toshi'..........toshi means
1.........happiness giver................(in my knowledge)
2......... "A M R I T" in hindi (holy water in english)!!!
3......... means mirror image in urdu it means a person who is loved by every one
4..........means profit in hindi its munafa
5.......... meaning as "A feeling of self sufficiency" In other words Content.
6..........means "Treasure".....
7..........means : "S A T I S F A C T I O N".
8.......... TOSHI comes from the Sanskrit word "Tusht" which means Satisfaction...so Toshi would be a person who is satisfied with what he/she has...
dont know what is the actual meaning but sure abt ....toshi.......
i want 2 do something very special and unique in my life coz i think i am very special and unique so i must do very special and unique.......................................
sometimes situations may be very opposite but i never fell down,and i know very well that i will achieve my goal...........................................
yes........i can do what i want to do..................................................
hey,one more thing which is more important abt me that is......................
I Am What i AM......and.....................I don care what peaple think abt me..............................

इनकी अद्यतन पोस्ट

मंगलवार, २६ जनवरी २०१०


मीडिया में नारी शोषण ....................
नारी कुदरत क़ी बनाई अनिवार्य रचना है ,जिसके उत्थान हेतु समाज के बुद्धिजीवी वर्ग ने सतत संघर्ष किया है। आज क़ी बहुमुखी प्रतिभाशील नारी उसी सतत प्रयास का परिणाम है। आज नारी ने हर क्षेत्र में अपना प्रभुत्व कायम किया है, चाहे वह शासकीय क्षेत्र हो या सामाजिक, घर हो या कोर्ट कचहरी , डाक्टर, इंजिनीयर, अथवा सेना का क्षेत्र, जो क्षेत्र पहले सिर्फ पुरुषो के आधिपत्य माने जाते थे, उनमे स्त्रियों क़ी भागीदारी प्रशंसा का विषय है। इसी तरह प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया भी स्त्रीयों क़ी भागीदारी से अछूता नहीं है ।
प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया समाज के दर्पण होते है, जिसमे समाज अपना अक्श देखकर आत्मावलोकन कर सकता है । पिछले कई वर्षो से मीडिया में नारी क़ी भूमिका सोचनीय होती जा रही है। आज प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया जिस तरह नारी क़ी अस्मिता को भुना रहा है, वह जाने - अनजाने समाज को एक अंतहीन गर्त क़ी ओर धकेलते जा रहा है। इसका दुष्परिणाम यह है क़ी आज नारी ऊँचे से ऊँचे ओहदे या प्रोफेशन में कार्यरत क्यों ना हो वह सदैव एक अनजाने भय से ग्रसित रहती है। क्या है ये अनजाना भय ? निश्चित रूप से यह केवल उसके नारी होने का भय है जो हर समय उसे असुरक्षित होने का अहसास दिलाता रहता है। आलम यह है क़ी आज नारी घर क़ी चारदीवारी में भी अपनी अस्मिता बचने में अक्षम है।

अब चिट्ठाकार चर्चा को देता हूँ विराम- आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम

बुधवार, 27 जनवरी 2010

उर्जावान चिट्ठाकार नवीन प्रकाश-"चिट्ठाकार-चर्चा" (ललित शर्मा)

कल २६ जनवरी को गणतंत्र दिवस भारतवासियों द्वारा धूम धाम से मनाया गया. हम क्यों पीछे रहते प्रतिवर्षानुसार हमने भी मनाया.सैकड़ों जगह के निमंत्रण थे, लेकिन कुछ ही जगह उपस्थित हो सके. बच्चों पुरे उत्साह के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये.नन्हे-मुन्ने निश्छल मासूमो के बीच बहुत आनंद आया, गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों में शामिल होना था इसलिए चिट्ठाकार चर्चा से एक दिन विराम लिया था. आज पुन: उसी उर्जा के साथ हम पहुँच गए हैं चिट्ठाकार चर्चा करने के लिए. चलिए मै ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ आज की चिट्ठाकार चर्चा पर.................
हमारे आज के चिट्ठाकार छत्तीसगढ़ से हैं. दिन में कभी ४-४ पोस्ट भी लगा देते हैं तथा अपने तकनीकि ज्ञान से ब्लाग जगत को समृद्ध कर रहे है. कंप्यूटर से सम्बंधित नयी-नयी जानकारियाँ ढूढ़ लाते हैं और हम तक पहुंचाते है. बहुत ही उर्जावान युवा हैं, मै बात कर रहा हूँ हिंदी टेक ब्लाग वाले नवीन प्रकाश जी की. इन्होने अपनी पहली पोस्ट २४ अगस्त २००९ को १२.३२ को प्रकाशित हुयी.इसके बाद ये सिलसिला जो शुरू हुआ निरंतर चल रहा है. २००९ में ४१३ पोस्ट तथा मेरे लिखते तक २०१० में ४७ पोस्ट लिख चुके हैं. इन पॉँच महीनो में इनकी ५०० पोस्ट पूरी होने वाली है.हम इन्हें बधाई देतेहै.

नवीन प्रकाश जी अपनी ब्लागर प्रोफ़ाईल पर बहुत कम शब्दों मे अपना परिचय देते हैं।


नवीन प्रकाश

      About Me
      बस एक कोशिश है जो थोडी बहुत जानकारियां मुझे है चाहता हूँ की आप सभी के साथ बांटी जाए। आप मुझे मेल भी कर सकते है hinditechblog@gmail.com
      Favorite Movies

      • Matrix A Wednesday

      इनकी पहली पोस्ट


      Hindi Tech Blog

      at 12:32 PM
      1 comments
      बस एक शुरुवात है जो थोडी बहुत जानकारिया मुझे है चाहता हु की आप सभी के साथ बाटी जाए .

      अद्यतन पोस्ट


      दो एक्स्प्लोरर एक साथ

      at 4:00 PM Labels: डेस्कटॉप
      2 comments

      आपके विंडोज एक्स्प्लोरर का एक बेहतर विकल्प जी आपको एक साथ दो एक्स्प्लोरर उपयोग करने की सुविधा देता है । अब आप ज्यादा आसानी से अपने फाइल और फोल्डर को कॉपी पेस्ट कर पायेंगे बार बार एक एक्स्प्लोरर विंडो से दुसरेविंडो पर जाने की जरुरत नहीं ।
      अब चर्चा को देते हैं विराम-सभी को ललित शर्मा का राम-राम

      मंगलवार, 26 जनवरी 2010

      आज दिया है चर्चा को विराम-सभी भारतवासियों को 26जनवरी की राम-राम

      आज दिया है चर्चा को विराम-सभी भारत वासियों को 26जनवरी की राम-राम
      ढेर सारी शु्भकामनाएं=आओ सब भारत वासी तिरंगा झंडा फ़हराएं
      मित्र पदम सिंग ने झांकियों के कुछ चित्र भेजे हैं उनका आनंद लिजिए



       

       

       

       

       

       

       

       

       



      सोमवार, 25 जनवरी 2010

      राकेश जाज्वल्य चिट्ठाकार-चर्चा मे-- (ललित शर्मा)

      कल २४ जनवरी को छत्तीसगढ़ के ब्लोगर रायपुर में मिले. सभी का एक दुसरे से रु-ब-रु परिचय हुआ. बहुत आनंद आया. आज ब्लाग जगत लोकतंत्र का पांचवां खम्बा बनने जा रहा है. ब्लाग जगत के सामने क्या चुनौतियाँ होंगी? भविष्य में तथा इसका निराकरण क्या होगा?. एक ब्लागर की जिम्मेदारियां क्या हैं? देश और समाज के सामने, इस पर गहन चिंतन करना है. आगे होने वाली बैठकों में. यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है. इस पर विचार कर समाधान ढूँढना अत्यावश्यक है. ब्लाग जगत मौज लेने की जगह नहीं है. इसका सार्थक उपयोग करना आवश्यक है. अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ आज की चिट्ठाकार-चर्चा पर..........
      हमारे आज के चिट्ठाकार हैं जांजगीर (छत्तीसगढ़ ) निवासी चिट्ठाकार राकेश जाज्वल्य. इनके ब्लाग का नाम राकेश  जाज्वल्य है. इस ब्लाग पर राकेश जी अपनी कवितायेँ लिखते हैं. राकेश जी ब्लाग जगत में मई २००९ से हैं तथा सक्रिय ब्लोगर हैं. जो कविताओं,गजल के माध्यम से अपनी बात कहते हैं. मन के सागर में उमड़ती घुमड़ती विचारों की लहरों को लेखनी के माध्यम से धरातल पर उतारते हैं. हम चिट्ठाकार चर्चा में इनका स्वागत करतेहैं.
      राकेश जी अपनी प्रोफाइल पर कुछ इस तरह अपने विषय में कहते हैं.

      RAKESH JAJVALYA

      मेरे बारे में

      कविताओं के माध्यम से खुद को जानने - पहचानने की प्रक्रिया भी जारी है ........

      रुचि

      पसंदीदा मूवी्स


      गुरुवार २८ मई २००९ को इनकी पहली पोस्ट............

       

      बचपन है नींदें है



      Rakesh

      राकेश जी की अद्यतन पोस्ट बुधवार 20 जनवरी 2010

      rakesh1

      अब देते हैं चिट्ठाकार-चर्चा को विराम-सभी को ललित शर्मा का राम राम

      रविवार, 24 जनवरी 2010

      मिलिए अजय लाहुली से-चिट्ठाकार-चर्चा (ललित शर्मा)

      अभी कुछ दिन पहले एक ब्लाग पर मेरी नजर पड़ी उसका नाम मुझे सुना हुआ लगा तो जिज्ञासा वश उस ब्लाग पर गया तो अद्भुत नजारा पाया. वह ब्लाग प्रकृति के चित्रों और नजारों से भरा हुआ था.बड़ा ही आनंद आया जैसे मै स्वयं ही  वहां पहुंच गया हुँ। इस ब्लाग का नाम है लाहुली तथा यह नाम मैने फ़िल्म "माला माल विकली" मे परेश रावल के मुंह से सुना था। मुझे ऐसा लगा कि यह ब्लाग दुसरी दुनिया के वासी का है। जहां से हम परिचित नही है.यह ब्लाग अजय लाहुली का है। ये चिट्ठा जगत मे अक्तुबर 2009 के अंतिम सप्ताह मे आए है। मै ललित शर्मा आपको ले चलता हुँ “चिट्ठाकार चर्चा” पर और सैर करते है लाहुली जैसे स्वर्ग की और जानते है वहां की संस्कृति एवं त्योहार ।

      अजय लाहुली अपनी ब्लागर प्रोफ़ाईल पर निम्न जानकारी देते हैं


      अजय लाहुलीlahuli

      इनकी प्रथम पोस्ट चित्रों से भरी हुयी है-आप भी देखिए

      (रास्ते से बर्फ़ सफ़ाई)

      ajay lahuli 1
      बर्फ जब पड़ती है तो दूर-दूर तक कुछ ऐसे चमक बिखरती है हर तरफ़ झक सफ़ेद।
      ajay lahuli3

      हमाले खेत की मूली-आईए खाईए
      ajay lahuli 6

      इनकी अद्यतन पोस्ट मे त्योहारों की जानकारी

      आप सबको 2010 हालडा,लोसर व खोगल की शुभकामनाएँ 

      लोसर, हालडा या खोगल लाहुल में सर्दियों में मनाया जाने वाला वर्ष का पहला पर्व या उत्सव है. इस आयोजन के ajay lahuli 7 बाद सर्दी खत्म होते तक अलग-अलग गाँव में अलग-अलग उत्सवों का दौर शुरू हो जाता है. लाहुल-स्पीति क्षेत्रफल के लिहाज से हिमाचल का सबसे बड़ा जिला है लेकिन आबादी सबसे कम (दो व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर). भाषा व बोलियों की विविधता के साथ सांस्कृतिक विविधता के बीच कुछ आयोजन ऐसे हैं जो पूरे लाहुल का सांझा आयोजन है. हालडा पर्व उन्ही में एक है. बौद्ध व हिन्दू आबादी वाले इस जिले में गाहर, पट्टन (चंग्सा, लोकसा,स्वान्गला/रेऊफा), तिनन, तोद, रंगलो, पतनम (म्याड), पिति (स्पीति), पंगवाली ( तिंदी), चिनाली व लोहार की भाषा-बोलियाँ हैं. तोद, रंगलो, पतनम (म्याड), पिति (स्पीति) की भाषा में समानता है,चंग्सा, लोकसा,स्वान्गला/रेऊफा बोली एक जैसे है, कुछ शब्दों को छोड़ दें तो फर्क सिर्फ लहजे व उच्चारण का है. भागा नदी के किनारे बसने वाली गाहर व तोद एक दुसरे के करीब होते हुए भी भाषा व बोली की दृष्टि से जुड़े नहीं हैं. चंद्रा नदी के किनारे की तिनन की आबादी रंगलो से अलग है. चंद्रा-भागा (चिनाब) के दोनों और पट्टन (चंग्सा, लोकसा,स्वान्गला/रेऊफा) की बोली में बहुत अधिक समानता है. लहजे व उच्चारण से अनुमान लग जाता है कि किस क्षेत्र से सम्बन्धित है

      गाहर 

      गाहर में हालडा 24 जनवरी को है. हालडा देवदार की लकड़ी को छोटे-छोटे चीर कर लकड़ी का गट्ठर बना कर ajay lahuli 8 तैयार होता है. बौद्ध पंचांग के अनुसार हालडा फाड़ने व तैयार करने के लिए उपयुक्त राशि के जातक का चयन किया जाता है. हालडा तैयार कर घर में पूजा के स्थान पर रखा जाता है. हालडा घर से रात को बाहर निकालने का समय भी पंचांग से ही तय होता है. हालडा फेंकने वाले घर के पुरुष सदस्य पारंपरिक भेष-भूषा में होते हैं तथा सर पर टोपी में गर्मियों में सहज कर रखे फूल पहनते हैं. घर में कई प्रकार के व्यंजन बनते हैं. हालडा निकालने से पूर्व घरों में कुल-देवता की पूजा होती है. भुने हुए जो से बने सत्तू का 'केन' बना कर उसमें घी डाला जाता है. केन व अरग या छंग ( देसी शराब) का कुल देवता को भोग लगाया जाता है. एक कप में केन डाल कर उसमे देवदार की हरी पत्ती लगते हैं. ये हालडा फेंकने वाला सदस्य अपने साथ ले जाता है. हल्डा को देवदार की हरी-सूखी पत्तियों व फूल से सवांरा जाता है. परिवार के सभी सदस्यों के सर पर खुशहाली व समृद्ध के प्रतीक के तौर पर घी का टिका लगाया जाता है. निश्चित अवधि के बाद हालडा को चूहले से जला कर घर से बाहर निकाला जाता है. ग्रामीण कतार में हल्डा को थामते हुए नगाड़े के साथ चलते हैं तथा गाँव के सीमा से दूर निर्धारित स्थल पर पूरे गाँव के हाल्ड़े को एक स्थान पर जलाते हैं.
      ajay lahuli 9
      अब चिट्ठाकार-चर्चा को देते है विराम-आपको ललित शर्मा का राम-राम