बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

डॉ.सत्यजीत साहु-आधुनिक चिकित्साशास्त्र एंव ज्योतिषशास्त्र का संगम-“चिट्ठाकार चर्चा” (ललित शर्मा)

नए मौसम आते हैं, ऋतुएं बदलती है. ऋतुओं का संधि काल होता है. ज्योतिष के द्वारा संधियों का काल जाना जाता था. भास्कराचार्य ने सिद्धांत शिरोमणि में कहा है कि वेदों में यज्ञों का वर्णन है और यज्ञ काल के आश्रित होते हैं. इसलिए जिसमे काल का वर्णन हो वह ज्योतिषशास्त्र वेद का अंग कहलाता है. ज्योतिष वेद का नेत्र इसलिए कहा गया है कि ज्योतिष से समय दिखलाई पड़ता है.संधियाँ कई प्रकार हैं. प्रात: सांय की संधि में हवन संधि, मास की संधि, ऋतू की सन्धि, चातुर्मास्य की सन्धि, दोनों अयनो की सन्धि. यही सब संधियाँ पर्व भी कहलाती हैं. इनका सूक्ष्म ज्ञान ज्योतिष से ही होता है. पक्ष और मास की सन्धि चाहे चन्द्रमा के स्थूल अवलोकन से पूर्णिमा और अमावश्य को हो जाये पर, ऋतू, अयन, संवत्सर का संविज्ञान जब तक सायन गणनानुसार ज्योतिष का ज्ञान ना हो, तब तक नहीं हो सकता. अर्थात हमारे जीवन में ज्योतिष का महत्व प्राचीन काल से है और इसके बिना हम अधूरे हैं....अब आप सोच रहे होंगे की ज्योतिष के विषय में मै क्यों लिख रहा हूं? तो आज आपसे एक ज्योतिषी से परिचय करवाना  चाहता हूँ. तो अब मै ललित शर्मा आपको ले चलता हूँ चिट्ठाकार चर्चा पर.............
हमारी आज की चिट्ठाकार चर्चा में शामिल चिट्ठाकार हैं डॉ.सत्यजित साहू. जो की पेशे से एम्.बी.बी.एस डाक्टर हैं तथा इनकी रूचि चिकित्सा के अध्यन के साथ-साथ ज्योतिष शास्त्र में भी है. जिसे पूरी श्रद्धा के साथ निभाते है. अपने मरीजों के हाथ की नाड़ी देखने के साथ-साथ उनकी जन्मकुंडली भी देखते हैं दोनों के सामंजस्य से सफल इलाज भी करते हैं. इनका डॉ.सत्यजीत साहू नामक ब्लाग है. इस पर वे अपने ज्योतिष विषयक पोस्ट लिखते हैं.
अपनी प्रोफ़ाईल पर ये परिचय कुछ इस तरह से देते है।

drsatyajit sahusatyajit sahu2

मेरे बारे में

I am medical practioner and remedial astrologer neumerologist.I am desciple of my beloved gurudev swami chinmaya yogi (shri rajat bose )who is desciple of bhagwan shree rajneesh (osho).NIRAV RAJNEESH MEDITATION CENTER (NRMC) is located at Budhapara Raipur (C.G.)This center is alloted by Bhagwan Shree Rajneesh in year 1979. I am practising here under the guidence of my Gurudev since 1999.I am on this blog to publish my view's on ASTROLOGY,GURUSHISHYA PARAMPARA,SPIRITUALITY AND OCCULT SCIENCE.
इनकी पहली पोस्ट

शुक्रवार, २४ जुलाई २००९




Why Dr.Satyajit Sahu is blogging


When Ramkrishna paramhansa hear the vivakanand singing the song "man chalo nij niketane" has got the stanza that" oh heart please keep the virtue well within the heart and keep it secret". Once a learned man denies to share me his experience by quoting this. All the world is related with communication and if you are not relating your self to other then gradually all the virtuous thing will vanish and this earth remain barren . so change it i am doing this . and now it is here. Well now it starts on blog to share the thought of drsatyajitsahu. I ask myself that why i write this blog? my answer is that i have passion for SPIRITUALITY, ASTROLOGY,NUMEROLOGY ,OCCULT SCIENCE,MEDICINE, GENERAL PRACTICE OF MEDICINE ,GURUSHIYSHA PRAMPARA,MEDITION. I have been doing all this since last 10 years. Plenty of thougths and personal findings are there with this journey.I have been with my gurudev since 1999 and had seen learn a lot of things regarding all rounds of life.
Now i am on blog to share my wonderful life with my beloved gurudev and my experience
अद्यतन पोस्ट

मंगलवार, २ फरवरी २०१०


गुरुकृपा से साबर तंत्र सिद्धि


गुरुदेव से मार्गदर्शन में हम गुरुभाई साधना १० साल से कर रहे है .पहले साधना सौम्य प्रकृति की थी पर अब हम लोग साबर तंत्र की साधना कर रहे है ।
जनवरी के चन्द्र और सूर्य ग्रहण में हम लोगो को सिद्धि का बहुत अच्छा अवसर मिला और भैरवी माँ और गुरुकृपा से हमारी साधना सफल रही ।
साबर तंत्र से लोगो की समस्या का तात्कालिक हल दिलाने में हम लोग कामयाब हो रहे है .इसके परिणाम दिखने से हमारा उत्साह बढ़ गया है .हमारी सारी ऊर्जा अब साबर साधना की तरफ है ।
गृहस्थ लोगो के लिए अघोर साधना अनुकूल नहीं होती है .वैदिक साधना में रिजल्ट बहुत देर से आता है .तंत्र का जो आकर्षण चमत्कारिक रिजल्ट प्राप्त करने के लिए हमरे मन में बहुत दिनों से था । साबर तंत्र का रिजल्ट देखने से मन की वो अभिलाषा पूरी हुई ।
साबर में जिन शक्ति के माध्यम से कम होता है वो शुभ शक्ति होती है .सभी शक्ति में गुरु की शक्ति सबसे बड़ी होती है .इस बात का प्रमाण साबर का रिजल्ट देखने के बाद और पुखता हुआ ।
अध्यात्म में ,साधना में , सदगुरु मिलने से ही कम बनता है .
जय गुरु महाराज की जय

अब देते है चिट्ठाकार चर्चा को विराम-आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम 

15 टिप्पणियाँ:

जी.के. अवधिया ने कहा…

चिट्ठाकारों से परिचित करवाने का बहुत सराहनीय कार्य कर रहे हैं आप ललित जी! बहुत बहुत धन्यवाद आपको!

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

खुशी हुई जानकार कि डॉ साहू दो-दो भिन्न भिन्न शास्त्रों के ज्ञाता है ! सराहनीय प्रयास !

यशवन्त मेहता "सन्नी" ने कहा…

badiya chittakar charca

Kulwant Happy ने कहा…

इन्हें पहली बार मिल रहा हूँ, आभार।
राजू बन गया 'दी एंग्री यंग मैन'

बाजारवाद में ढलता सदी का महानायक

Udan Tashtari ने कहा…

डॉ.सत्यजित साहू से परिचय का आभार.

निर्मला कपिला ने कहा…

आपका ये प्रयास अच्छा लगा कम से कम किसी चिट्ठा कार के बारे मे और उसके रचना संसार के बारे मे पता तो चलता है नही तो खाली सब की पोस्ट दिखा दी उस चिट्ठा चर्चा का क्या लाभ वो तो ब्लागवाणी भी दिखा देता है शुभकामनायें

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

डॉ. सत्यजीत साहू से मिलवाने के लिए आभार!

M VERMA ने कहा…

डॉ.सत्यजित साहू के बारे में जानकारी प्राप्त करके अच्छा लगा.

सुन्दर चर्चा

ललित शर्मा ने कहा…

नि्र्मला जी सादर प्रणाम,
आपकी सलाह का हम आदर करते हैं।
शुक्रिया

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

सराहनीय..

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

अत्यन्त सराहनीय उद्यम है आपका ! डॉ० सत्यजीत की रुचि दो भिन्न ज्ञान-क्षेत्रों में समान रूप से है, जानकर अच्छा लगा । आभार परिचित कराने के लिये !

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

....ऊंचाईयों की ओर बढते कदम,बधाई!!!!!

अजय कुमार झा ने कहा…

आदरणीय ललित जी , बहुत ही सुंदर चर्चा रही हमेशा की तरह

आदरणीय निर्मला जी ,
आप जिस चर्चा को व्यर्थ कह रही हैं या ये कि ऐसा तो ब्लोगवाणी भी करता है , ये सच में उतना आसान भी नहीं है , और इसमें भी काफ़ी श्रम लगता है , ये बात सिर्फ़ चर्चाकार ही समझ सकते हैं , और ये कम से कम विवाद पैदा करते, जबरन कलम घसीटी आदि से तो बहुत बेहतर है । आगे की बात मैं अपनी चर्चा में शायद बेहतर तरीके से कह सकूं

अजय कुमार झा

संगीता पुरी ने कहा…

डॉ साहब से परिचय करवाने के लिए धन्‍यवाद !!

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

डॉ.सत्यजित साहू जी से परिचय का आभार!!!!