कल ममता का रेल बजट आया और सारी समस्याओं का ठीकरा लालू के सर पर फोड़ा, मैनेजमेंट गुरु हो चुके लालू के मेनेजमेंट का सारा भंडा फोड़ कर रख दिया. जो हमने सोचा समझा था वही हुआ. आंकड़ों के खेल से लालू ने सबको चकित कर दिया था. लेकिन अब कलाई खुलने पर पता चला है कि झोल कहाँ पर था? ममता ने सब कुछ सामने ला दिया. नहीं लाती तो ये भांडा उनके सर पर फूटता. सबको अपना गला बचाने की पड़ी है और रेल बजट कुछ खास नहीं रहा. बंगाल और बिहार को ही प्रतिवर्षानुसार नवाजा गया. अन्य दुसरे प्रदेशों की अनदेखी की गई. खास कर छत्तीसगढ़ की. यहाँ का बिलासपुर जों भारत में रेलवे को सबसे ज्यादा मुनाफा देता है. रेलवे की आया का १२% बिलासपुर से ही मिलता है. लेकिन सुविधाओं के नाम कुछ भी नहीं. यहाँ के लोग अब अपनी अनदेखी बर्दास्त नहीं कर पा रहे हैं और आन्दोलन के मूड में हैं. अब मै ललित शर्मा ले चलता हूँ आपको आज की चिट्ठाकार चर्चा पर..............
आज की चिट्ठाकार चर्चा में शामिल हैं डॉ.रूपचंद शास्त्री. जिन्हें ब्लाग जगत के लगभग सभी चिट्ठाकार जानते हैं. आप स्वयं चिटठा-चर्चाकार हैं. बहुत उर्जा हैं इनमे. नित्य बिला नागा चिटठा चर्चा करते है. कभी-कभी तो दिन में दो चर्चाएँ भी हो जाती हैं. एक अकेले मिशनरी जैसे हिंदी की सेवा में लगे रहते है इनके कई चिट्ठे हैं जिनमे उच्चारण प्रमुख है.अन्य चिट्ठे इस प्रकार है--मयंक---शास्त्री "मयंक"---शब्दों का दंगल--चर्चा मंच--नन्हें सुमन--अमर भारती--अन्य चिट्ठो पर भी इनकी सेवाएं उपलब्ध है जैसे..चर्चा हिन्दी चिट्ठों की !!!-----नन्हा मन----पल्लवी--पिताजी--हिन्दी साहित्य मंच--तेताला--नुक्कड़---इत्यादि.................
अपने ब्लाग प्रोफाइल पर लिखते है..........
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
- लिंग: पुरुष
- उद्योग: शिक्षा
- स्थान: KHATIMA : Uttarakhand : भारत
मेरे बारे में
एम.ए.(हिन्दी-संस्कृत)। सदस्य - अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग,उत्तराखंड सरकार, सन् 2005 से 2008 तक। सन् 1996 से 2004 तक लगातार उच्चारण पत्रिका का सम्पादन। मेरे बारे में अधिक जानकारी निम्न लिंक पर भी उपलब्ध है- http://taau.taau.in/2009/06/blog-post_04.html प्रति वर्ष 4 फरवरी को मेरा जन्म-दिन आता है।उच्चारण की पहली पोस्ट
बुधवार, २१ जनवरी २००९

सुख का सूरज उगे गगन में, दु:ख का बादल छँट जाए।
हर्ष हिलोरें ले जीवन में, मन की कुंठा मिट जाए।
चरैवेति के मूल मंत्र को अपनाओ निज जीवन में -
झंझावातों के काँटे पगडंडी पर से हट जाएँ।
अद्यतन पोस्ट
होली आई, होली आई,
गुझिया मठरी बर्फी लाई,
पिस्ता बर्फी हरी-भरी है,

पीले, हरे गुलाल लाल हैं,
रंगों से सज गये थाल हैं.
कितने सुन्दर, कितने चंचल,
हाथों में होली की हलचल,
पीले, हरे गुलाल लाल हैं,
रंगों से सज गये थाल हैं.
कितने सुन्दर, कितने चंचल,
हाथों में होली की हलचल,
अब देता हूँ चर्चा को विराम-आपको ललित शर्मा का राम-राम
23 टिप्पणियाँ:
वाह रंगों के साथ मिठाईयों की भी फ़ोटू, कल ही बज्ज पर देखे थे, मजा आ गया।
पेट में चूहे कूदने लगे...
बहुत खूब , लेकिन ललित भईया आपसे बहुत नाराजगी है , अब देखिए नां सुबह-सुबह मिठाई दिखाकर आपने जी ललचा दिया ।
are waah...itna sab kuch ...lagta hai ab saari raat mitaaiyon ka hi sapna dekhenge ham..
bahut bahut bahut sundar prastuti..
bahut sunder aur mithaiya lubhavnee........
bahut sunder aur mithaiya lubhavnee........
बहुत बढ़िया, पकवान दिखा कर ही लार टपका दी ! भला शास्त्री जी जैसे शख्सियत के लिए परिचय की जरुरत ही क्या है !
तन-मन में मस्ती उभरी है,
पिस्ता बर्फी हरी-भरी है.khane ka jugad karo.khali pili kam nahi chalega. nice
यह भी नया अंदाज़,बढ़िया.
Sundar characha....Kaal bhi ji lalachaya tha aaj aapane phir se :)
Aabhar
शास्त्री जी का जवाब नहीं
सुन्दर चर्चा
सचमुच शास्त्री जी का जबाब नहीं !!
शास्त्री जी मिलवाने के शुक्रिया
dr. shastri ji se milkar achha lagaa.c.g ko railway ke sndarbh me aandolan karanaa chahiye.
वाह ... शास्त्री जी को मुख्य बिंदु बना कर की गयी चर्चा बहुत लाजवाब रही ... शास्त्री जी से आज कोई ब्लॉगर अपरिचित नही होगा ......
... खूब ललचा रहे हो ... लगता है कुछ खाना ही पडेगा !!!
लाजवाब..होली अभी से रंग भरने लगी हैं..मजेदार है..बधाई.
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शब्द सृजन की ओर पर पढ़ें- "लौट रही है ईस्ट इण्डिया कंपनी".
सभी ब्लॉगर मित्रों को धन्यवाद एवं
प्रियवर ललित शर्मा जी को आभार!
आज सब ललचा ललचा के मारेंगे....मुझे....
ऐसी तस्वीरें क्यों लगाते हैं भूख बढ़ जाती है
ब्लॉग पर गूगल बज़ बटन लगायें, सबसे दोस्ती बढ़ायें
wahwa.....
वाह जी वाह पकवानों के चित्र और उनका उतना ही लुभावना वर्णन मजा आगया बस । मयंक जी का अनेक धन्यवाद ।
आज फिर से यहाँ पोस्ट हुई...तो मुझे भी अवसर मिल गया शास्त्री जी के बारे में जानने का...शुक्रिया....
बहुत सुन्दर कविताएँ और पकवान भी
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