शनिवार, 23 जनवरी 2010

प्रख्यात रंगकर्मी रचनाकार-बाल कृष्ण अय्यर-“चिट्ठाकार चर्चा” (ललित शर्मा)

सेन्सेक्स लुढक गया है सोने मे गिरावट है और डालर मे तेजी, गरीब की दाल रोटी मंहगी हो रही है। सोना सस्ता हो जाए तो भी सबसे पहले दाल रोटी की ही जरुरत पड़ेगी। हमारे यहाँ एक बिजली मिस्त्री है जो पहले अपनी मे्हनत से अच्छी कमाई कर लेता था तथा हफ़्ते के सातों दिन पीकर मस्त रहता था। लेकिन कल मिला तो बोला महाराज कमाई तो उतना ही लेकिन पीआई कम हो गया है क्योंकि राशन का खर्च बढ गया है अब तो हफ़्ते मे एकाध बार पार्टी हो गयी तो ठीक नही तो उसका भी ठिकाना नही है। अब इस मंहगाई ने सबका बाजा बजा दिया है इससे शेयर बाजार का सांड भी भन्नाया हुआ है इसलिए सांड से बचना जरुरी है अब मै ललित शर्मा चलता हुँ "चिट्ठाकार चर्चा" पर..............................
"चिट्ठाकार चर्चा" में शामिल हमारे आज के चिट्ठाकार हैं प्रख्यात रंग कर्मी और नाट्य निर्देशक श्री बाल कृष्ण अय्यर जी.अपने नाटकों के माध्यम से समाज में हो रहे बदलाव तथा उसमे पनप रही विकृतियों को सामने लाते हैं. जीवन की आप-धापी के बीच पारिवारिक संबंधों में पनप रही असहयोग की भावना एवं परिवार के बीच आपस में बढ़ रही दूरियों को नाटकों के माध्यम से प्रदर्शित करते हैं. नाटक इनका जूनून है साथ ही नाटकों की पट कथा लेखन के साथ  आलेख एवं कवितों के माध्यम से मनोभावों का चित्रण करते है. चिटठा जगत में में इनकी उपस्थिती अक्तूबर २००८ से है. लेकिन ब्लाग पर कभी सक्रीय नहीं दिखाई दिये. लेकिन २००९ के आखरी महीनो में इनके ब्लाग IYER : EXPRESSIONS पर  सक्रियता नजर आई. इनका एक और ब्लाग यात्रा - एक यायावर का सफर् है इस पर भी इन्होने अक्तूबर 2009 लेखन कार्य प्रारंभ किया. आप चर्चा पान की दुकान पर भी लेखन सहयोगी है. जीविकोपार्जन के लिए दिन-रात नोटों के बीच रहते हैं और नोट लेते देते हैं. यानी की बैंक कर्मी हैं.

बाल कृष्ण अय्यर जी अपने प्रोफाईल पर कुछ इस तरह लिखते हैं.

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मेरे बारे में

नाट्य लेखन, निर्देशन, अच्छा साहित्य पढ्ना और यात्रायें करना.

बाल कृष्ण अय्यर जी के द्वारा निर्देशित नाटकों की एक झलक  आप भी देखिये

प्रथम व्यक्ति का मंचन रायपुर में ....
रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर  हम लोगों  ने प्रथम व्यक्ति का मंचन किया , छत्तीसगढ़ आर्ट्स एंड थियेट्रिकल सोसाइटी  संस्था  के गठन के बाद  ये हमारा पहला  प्रयास था, छत्तीसगढ़ के दुर्ग  शहर  में  नाटक से सम्बंधित गतिविधियाँ  कम ही है, ज्यादातर  नाटक भिलाई में ही होते है. दुर्ग में नाटकों का माहौल बनाने का प्रयास जारी है. b.g
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हमीरपुर की सुबह
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बालकृष्ण जी की एक कविता

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अब देता हुँ चर्चा को विराम-सभी को ललित शर्मा का राम

11 टिप्पणियाँ:

जी.के. अवधिया ने कहा…

अय्यर जी का परिचय पाकर बहुत खुशी हुई। कल रायपुर में उनसे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात भी हो जायेगी।

निर्मला कपिला ने कहा…

रय्यर जी का परिचय जान कर बहुत अच्छा लगा उन्हें बहुत बहुत शुभकामनायें

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

अय्यर जी के बारे में बढ़िया परिचय प्रस्तुति, ललित जी ! हाँ , यार साहब की कविता समय के मार्फत कविता भी बहुत पसंद आई !

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

राम राम
परन्‍तु बहुत काम की
दे रहो हो जानकारी
बहुमत पाओगे।

राजीव तनेजा ने कहा…

अय्यर जी के बारे में जान कर अच्छा लगा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

श्री बालकृष्ण अय्यर से मिल कर अच्छा लगा!

महफूज़ अली ने कहा…

श्री बाल कृष्ण अय्यर जी को नमन.....

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

... यह ब्लाग निश्चिततौर पर ऊंचाईयों को छुयेगा ... शुभकामनाएं !!!!!

मनोज कुमार ने कहा…

उत्तम जानकारी!

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

अय्यर जी के बारे में जानना सुखकर है । आभार ।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

अय्यर जी के बारे में जानकर अच्छा लगा।